Sunday, 8 March 2020

स्व रचित कविता - आनंद उत्सव

आनंद उत्सव

सब भूल जाओ, मूल में समा जाओ ।
जग शूल में, फूल बन खिल जाओ ।।

खेलो स्व आत्मा परमात्मा स्वाशों संग होली ।
पंच तत्त्व चोले भीतर सत्य आनंद रंग ।।

खेलो खेलो होली, सतरंग कभी न होवे बदरंग ।
मन प्रहलाद की जय जय, मन खेले आत्मा संग ।।

हर दिन हर पल, मन मनाये होली आनंद-उत्सव ।
ईश्वर स्वयं प्रकट, मन प्रहलाद की भक्ती देख ।।

सब भूल जाओ, मूल में समा जाओ ।
जग शूल में, फूल बन खिल जाओ ।।

पुष्पा गोयनका