आनंद उत्सव
सब भूल जाओ, मूल में समा जाओ ।
जग शूल में, फूल बन खिल जाओ ।।
खेलो स्व आत्मा परमात्मा स्वाशों संग होली ।
पंच तत्त्व चोले भीतर सत्य आनंद रंग ।।
खेलो खेलो होली, सतरंग कभी न होवे बदरंग ।
मन प्रहलाद की जय जय, मन खेले आत्मा संग ।।
हर दिन हर पल, मन मनाये होली आनंद-उत्सव ।
ईश्वर स्वयं प्रकट, मन प्रहलाद की भक्ती देख ।।
सब भूल जाओ, मूल में समा जाओ ।
जग शूल में, फूल बन खिल जाओ ।।
पुष्पा गोयनका